मेरी कलम से
कविता की शक्ति '
कविता का 'क' 'कर्म' सिखाता,
'वि' से 'विकास'जग का,
'ता' का मतलब 'ताकत' से है,
मंजुल हृदय कवि का;
जब 'ताकत' को सही दिशा में,
सही 'कर्म' में लगाएँगे,
तब 'विकास' के मीठे फल का,
हम सब रस चख पाएँगे ;
है द्रवित हृदय,कुण्ठित भाषा,
शोषित समाज है सारा,
इस शोषण को हम दूर करेंगे,
है यह अधिकार हमारा;
जब पूर्ण 'कर्म' की 'ताकत' से,
'विकास' ज्योति लहराएगी,
तब 'कविता' सच्चे अर्थों में,
अर्थपूर्ण कहलाएगी ।
डाॅ शिल्पी श्रीवास्तव
डी•फिल•संस्कृत,
इलाहाबाद विश्वविद्यालय
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