कविता

             उम्र के पड़ाव
हमें ज़िंदगी के रंग में ढलना होगा,
हर उम्र के साथ शौक़ बदलना होगा,
         वो बचपन में परियों का सपनों में आना,
         वो रेतों के महलों को मिलकर बनाना,
         वो मौसम की बूंदों पे खुलकर थिरकना,
         वो छोटी सी बातों पे आंसू का गिरना,
था यौवन भी अल्हड़, थी उसकी कहानी,
थे सपने सुहाने,थी सुर में रवानी,
ना अपनों से भी मन की बातों को कहना,
वो नींदे ना आना, वो रातों को जगना,
          बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िंदगानी,
          वो दुनिया अलग थी, अलग थी कहानी,
          अब जिम्मेदारियों के बोझ तले चलना होगा,
          हर उम्र के साथ शौक़ बदलना होगा।

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